कमल विहार योजना का जीन्न बाहर आया
रायपुर CG4भड़ास. कॉम. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट में योजना का प्रजेंटेशन और मंत्रियों के सुझावों के साथ ही .रायपुर विकास प्राधिकरण की विवादास्पद कमल विहार योजना को कैबिनेट से हरी झंडी मिल गई । इस योजना लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही कैबिनेट ने योजना के तहत भूखंड की रजिस्ट्री पर स्टांप ड्यूटी माफ करने का निर्णय लिया। योजना का विरोध कर रहे पीडब्लूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने प्रजेंटेशन के दौरान कहा कि इसमें छोटी जमीन वालों को नुकसान हो रहा है। इनको बड़ा विकसित भूखंड देने का प्रावधान करना चाहिए। उन्हें कम से कम इतना बड़ा प्लाट देना चाहिए कि मकान बनाया जा सके। ऐसा प्रावधान भी करना चाहिए कि कोई अतिरिक्त भूखंड लेना चाहे तो उसे न्यूनतम दर पर विकसित भूखंड दिया जा सके।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अफसरों को निर्देश दिए कि श्री अग्रवाल के सुझावों के आधार पर योजना में आवश्यक फेरबदल कर लिया जाए। श्री अग्रवाल यह भी चाहते हैं कि जिस हितग्राही की जमीन जहां पर है, उसे उसी स्थान पर प्लाट देने की व्यवस्था की जाए। उनके इन सुझावों पर पंचायत मंत्री रामविचार नेताम और अन्य मंत्रियों ने भी सहमति जताई। विभाग के अफसरों ने मंत्रिमंडल के सदस्यों के सामने करीब 40 मिनट तक कमल विहार योजना का प्रजेंटेशन दिया। इसे शहरों के विकास के लिए मॉडल योजना के तौर पर बताया गया। प्रजेंटेशन के बीच-बीच में मंत्रियों ने अपने सुझाव रखे। मुख्यमंत्री ने भी मंत्रियों के सुझावों को स्वीकार करते हुए योजना पर अमल जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि इस विवादास्पद मामले में तीन महीने पहले हुई कैबिनेट की बैठक में श्री अग्रवाल की आवास एवं पर्यावरण मंत्री राजेश मूणत से तीखी झड़प हो गई थी। इस बात का ध्यान रखते हुए आज इस संबंध में मुख्यमंत्री ने जवाब दिए। छोटे भूस्वामी को मकान बनाने लायक विकसित प्लाट दिए जाएं।रियायती दर पर अतिरिक्त जमीन देने का प्रावधान किया जाए जिसकी जमीन जहां, वहीं पर विकसित भूखंड दिया जाए योजना के क्रियान्वयन में अनावश्यक देर न किया जाए भ्रम दूर करने योजना के बारे में लोगों को बताया जाए योजना के तहत भूखंडों का पंजीयन शुरू हो जाएगा। अब तक इसके लिए संबंधित भू स्वामियों से सहमति ली गई है। पंजीयन शुल्क में माफी से रजिस्ट्रेशन संभव होगा। इसके अलावा योजना के क्रियान्वयन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का काम शुरू हो जाएगा। राज्य के छोटे शहरों में अव्यवस्थित विकास को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सिद्धांतत: निर्णय लिया है कि इसके लिए राज्य स्तर पर प्राधिकरण गठित किया जाए। इसका कामकाज हरियाणा विकास प्राधिकरण की तर्ज पर होगा। इसे छत्तीसगढ़ नगर विकास प्राधिकरण नाम दिया जा सकता है। विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम में संशोधनों को मंजूरी दे दी। इसके तहत मकान मालिक और किराएदार दोनों के दायित्वों को नए सिरे से परिभाषित किया जा रहा है। संशोधन विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा। रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) अपने अब तक के सबसे बड़े प्रोजेक्ट कमल विहार को पांच की बजाए तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। प्राधिकरण के सीईओ अमित कटारिया के मुताबिक सोमवार को देर शाम कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद सबसे पहले रिंग रोड और सेक्टरों की सड़कें बनाई जाएंगी। स्कीम चार पर पूरा ध्यान केंद्रित करके इसके 15 सेक्टरों को विकसित किया जाएगा। सबसे पहले रिंग रोड व अंदर के सेक्टरों की सड़कें बनाई जाएंगी। साढ़े तीन किमी लंबी रिंग रोड का काम अप्रैल से शुरू कर दिया जाएगा। अक्टूबर 2010 में इसका टेंडर जारी हो चुका है। सड़कों के साथ ही साथ अंडर ग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम, वॉटर सप्लाई, अंडर ग्राउंड इलेक्ट्रिफिकेशन व आधारभूत संरचना का काम शुरू कर दिया जाएगा। ताकि लोगों को अलग टाउनशिप जैसी सुविधा मिले। कमल विहार इलाके में जल आवर्धन योजना के तहत बन रहे 150 एमएलडी के नए फिल्टर प्लांट से पानी मिलेगा। प्लांट से वहां तक पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इलाके में ओवरहेड टैंक का कोई प्रावधान नहीं है। पाइप लाइन सीधी अंडर ग्राउंड संपवेल से जुड़ेगी। इसके बाद इलाके में बनने वाले सभी घरों में 24 घंटे वॉटर सप्लाई की जाएगी। इलाके में बनने वाले घरों में ओवर हैड टैंक बनाने की जरूरत ही नहीं होगी। अफसरों का कहना है कि इससे पानी की बचत भी होगी। रिसर्च के मुताबिक जब पानी को स्टोर नहीं किया जाता है तो व्यक्ति सिर्फ उतना ही पानी खर्च करता है, जितनी कि उसे आवश्यकता है। ऐप्रूवल के बाद सबसे पहले रिंग रोड बनाई जाएगी। रिंग रोड का टेंडर अक्टूबर में हो गया है। अप्रैल में इसका काम शुरू हो जाने की संभावना है। इसके बाद इंटरनल सेक्टरों की सड़कें बनाई जाएंगी। फिर अंडर ग्राउंड सीवरेज सिस्टम, वॉटर सप्लाई, अंडर ग्राउंड इलेक्ट्रिफिकेशन व सबसे अंत में आमोद प्रमोद की जमीनों को विकसित किया जाएगा। कमल विहार योजना पर अब तक हाईकोर्ट में 8 याचिकाएं लगाई जा चुकी हैं। अब तक मामले तीन पेशियां हो चुकी हैं। 3 फरवरी को हुई अंतिम पेशी में बहस नहीं हुई। अगली पेशी 25 मार्च को होगी। कैबिनेट के ऐप्रूवल के बाद योजना का विरोध कर रहे लोगों की सारी उम्मीद हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद प्राधिकरण सबसे पहले योजना से प्रभावित लोगों के साथ एग्रीमेंट की तैयारी कर रहा है। कुल 5730 प्रभावित भूस्वामियों में से लगभग चार हजार से अधिक लोगों ने योजना पर सहमति दे दी थी। इन लोगों से अनुबंध करने के बाद आरडीए जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करेगा। बोरियाखुर्द, डूंडा, देवपुरी, टिकरापारा व डूमरतराई इलाके के 1600 एकड़ के कमल विहार इलाके में लगभग 10 हजार प्लॉट काटे जाएंगे। ये प्लॉट योजना से प्रभावित हो रहे 5730 भूस्वामियों के अलावा प्राधिकरण द्वारा बेचे भी जाएंगे। प्रभावित भूस्वामियों में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिनके पास 10 से 15 तक प्लॉट हैं। आरडीए ने 555 करोड़ की योजना बनाई तथा इसकी अनुमानित लागत 815.37 करोड़ रखी गई थी। योजना को सेंट्रल बैंक से 500 करोड़ रुपए का लोन भी मिल चुका है कमल विहार योजना और उसके कुछ नियमों की वजह से लोगों को हो रही परेशानी के मुद्दे प्रतिष्ठित अखबारों ने प्रमुखता से उठाया था । ताकि लोगों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके। छोटे प्लॉट धारकों ने श्री बजाज के सामने अपना दुखड़ा रोया था। इनमें से अधिकांश नौकरीपेशा लोग थे। उनका कहना था कि जीवन भर की गाढ़ी कमाई लगाकर अपने बच्चों के लिए जमीन खरीदी है। मगर योजना आने से जमीन का आकार छोटा हो गया। आरडीए के कैलकुलेशन के बाद उनकी जमीन काफी छोटी हो गई है। इस जमीन उनका मकान काफी छोटा बनेगा। अनेक लोग ऐसे थे, जो चाहते थे कि पैसे लेकर उन्हें अतिरिक्त जमीन मिल जाए। सोमवार को कैबिनेट ने बिलकुल उसी तर्ज पर छोटे भूखंड धारकों को रियायती दर पर जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय दिया है। प्राधिकरण के चेयरमैन सुनील सोनी ने बताया कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद स्कीम चार पर ही पूरा ध्यान केंद्रित किया जाएगा। स्कीम चार को मॉडल के रूप में विकसित करने के बाद जनता का विश्वास हासिल किया जाएगा। इसके बाद ही अन्य स्कीम की ओर ध्यान दिया जाएगा। गौरतलब है कि आरडीए कमल विहार की तरह छह और स्कीम लाने वाला है। इन सात स्कीमों के तहत लगभग साढ़े 14 हजार एकड़ जमीन को डवलप किया जाएगा। प्राधिकरण के सीईओ अमित कटारिया ने बताया कि योजना को दो फेज में पूरा किया जाएगा। पहले फेज में अधोसंरचना मद का काम और दूसरे फेज में आमोद-प्रमोद व गार्डन विकसित करने का काम होगा। तीन साल में अधोसंरचना मद का पूरा काम कर दिया जाएगा। अप्रैल के पहले हफ्ते से सड़कों का काम शुरू कर दिया जाएगा। कमल विहार इलाके का मसला अक्टूबर में कोर्ट में चला गया था। इसके बाद इलाके की जमीन के दाम स्थिर से हो गए थे। सोमवार को कैबिनेट से मंजूरी के बाद जमीन के रेट में जबर्दस्त उछाल आने की उम्मीद की जा रही है। मई में कमल विहार इलाके की जमीन के दाम 25 से 35 लाख रुपए एकड़ में जमीन मिल रही थी। 16 जुलाई 2010 को योजना के नोटिफिकेशन के बाद जमीन के दाम 55 से 60 लाख रुपए हो गए। 60 लाख रुपए एकड़ की जमीन की 35 प्रतिशत विकसित भूखंड के हिसाब से 400 रुपए फीट में जमीन की कीमत हो गई थी। यह कीमत अब तक अपरिवर्तित थी। जमीन के जानकारों का कहना है कि कैबिनेट से अप्रूवल मिलने के बाद अगर आरडीए एक साल के अंदर सड़कों का काम खत्म कर देता है तो 900 से एक हजार रुपए फीट में भी जमीन मिलना मुश्किल हो जाएगा। पुराना धमतरी रोड़ जो कि योजना के पीछे वाले इलाके पर पड़ता है वहां की जमीन के भाव 300 से 350 रुपए फीट हो चुके हैं, जबकि कमल विहार का इलाका काफी पॉश माना जा रहा है।
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