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प्रशासनिक अधिकारी का पुत्र - मीडिया प्रतिनिधि कर रहे है शहर में वसूली

           कांकेर । प्रसार भारती, भारतीय प्रसारण निगम भारत सरकार केन्द्र निदेशालय के केवल टेलीविजन नेटवर्क अधिनियम को बलाये ताक पर रखकर स्थानीय जिला कलेक्टर के अधीन आबकारी विभाग में शहर के पांच पंजीकृत केबल संचालकों द्वारा बेखौफ अपने-अपने पसंदीदा चैनलों का  प्रसारण मनमाने ढंग से किया जा रहा है, जिससे केबल उपभोक्ता चाहकर भी अपनी पसंद का चैनल नहीं देख पाते हैं। बात यहीं तक नहीं रूकी है इसके आगे का आलम यह है कि सेवा शुल्क के नाम पर केबल उपभोक्ताओं से मनमानी राशि भी प्रतिमाह वसूली की जा रही है, जिसकी न तो कोई पंजीकृत रसीदें वापस उपभोक्ताओं को दी जाती है, और न ही किसी प्रकार की सुविधा उन्हें दी जाती है ।

अलबत्ता इसके एवज में जिला आबकारी कार्यालय में मात्र दस रूपये प्रति उपभोक्ताधारी की दर से मनोरंजन टैक्स ही मात्र पटाया जाता है। सबसे अहम गड़बड़ी तो यह है कि लगभग 20-25 हजार की आबादी वाले इस नगर पालिका क्षेत्र में ये पांचो आपरेटर मिलकर कुल 956 केबल धारकों का ही मनोरंजन शुल्क जमा करवाते हैं, जबकि प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग 1500 से 1700 के बीच शहर में केबल कनेक्शनधारी उपभोक्ता है। लगभग 600 से 700 केबल कनेक्शनधारियों का मनोरंजन शुल्क चोरी करके सरकार के राजस्व का तो नुकसान तो यह केबल संचालक कर  ही रहे हैं, साथ ही कलेक्टर कांकेर द्वारा सेवा शुल्क का निर्धारित मापदण्ड के अभाव में मनमाने सेवा शुल्क 100,200, 300 व 350 रु. तक की वसूली कर उपभोक्ताओं की जेब खाली कर खुद मालमाल हो रहे हैं ।

शहर के अंदर विभिन्न समाचार एजेन्सी जिन्हें इलेक्ट्रानिक मीडिया कहा जा रहा है को साथ जोड़कर रौबदार तरीके से मालामाल हो रहे इन केबल संचालकों पर शिकंजा कसने की  तौहमत प्रशासन भी नहीं उठा पा रहा है । इस संदर्भ में स्थानीय दूरदर्शन कार्यालय जो जानकारी उपलब्ध हुई है, उसके अनुसार भारत सरकार के राजपत्र में निम्नांकित दिशा-निर्देश भी केवल संचालकों को प्रेषित किये गये हैं , बावजूद इसके दिये गये  दिशा निर्देशों का पालन करना तो दूर बल्कि उनके चैनलों पर बेजा कब्जा कर अपनी गानों की धुनें सुनाने में केबल आपरेटर मदमस्त हैं । जिला आबकारी विभाग में केबल संचालकों द्वारा जो केबल कनेक्शनधारियों की संख्या प्रस्तुत की गई है उसके सरकारी आंकड़े इस प्रकार से हैं , जिनमें मतीन खान - 221, चिराग केबल शंकर आहुजा 433, आर.के. केबल सपना हिरदानी 180, दीपक शोरी - 54 एवं संजीव सिंग के 68 केबलधारी है । इसके अलावा अवैध केबल आपरेटर भी ईक्का-दुक्का है जिन्हें पांचों केबल आपरेटरों का संरक्षण प्राप्त है, ऐसे अवैध केबल संचालक शहर स्थित राजापारा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं ।
इधर प्रसार भारती प्रसारण निगम दूरदर्शन अनुप्रसारण केन्द्र कांकेर के सहायक अभियन्ता के द्वारा दिनांक 1-11-2003 को बकायदा शंकर आहुजा केबल आपरेटर के नाम प्रसार भारती के आदेश क्रमांक सी.ई.डब्ल्यु/टी.वी.एम./603/2003, दिनांक 29.10.03 के तहत दिनांक 1.11.03 से डी.डी. न्यूज चैनल को केबल प्रसारण में अनिवार्यता प्रदान करने दिशा-निर्देश भी दिया गया  था जिसकी प्रतिलिपि तात्कालीन जिला कलेक्टर कांकेर को भी प्रेषित की गयी थी । साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय  नई दिल्ली, मुख्य अभियंता
(दूरदर्शन) मुंंबई व दूरदर्शन अनुरक्षण केन्द्र, रायपुर  को दी गई थी । इस पत्र की प्राप्ति भी शंकर आहुजा केबल आपरेटर द्वारा की गई है बावजूद इसके अनियमितता लगातार केबल आपरेटरों द्वारा लगातार बरती जा रही है।
इसके ठीक बाद पुन: प्रसार भारती दूरदर्शन केन्द्र शंकर नगर, रायपुर (छ.ग.) द्वारा शंकर आहुजा केबल आपरेटर कांकेर को पंजीकृत डाक से पत्र क्रमांक रायपुर/दुदके/4(8)/2003-ई (केबल) 2324 दिनांक 25.11.03 को कमलेन्द्र सरभाई के द्वारा भेजकर केबल अधिनियम टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम 1995 की ओर ध्यान आकृष्टï कराते हुए निर्देश दिया गया है कि दूरदर्शन के तीन डी.डी.1 (राष्टï्रीय चैनल), डी.डी. समाचार चैनल तथा डी.डी. भारती का प्रसारण केबल आपरेटरों द्वारा किया जाना अनिवार्य है ।  प्रसारण  के लिए डिजिटल सिग्नल 12 फीट से अधिक व्यास की डिश एंटीना द्वारा उपग्रह से प्राप्त कर उसका प्रसारण 2 से 4 तथा चैनल 5 से 12 में किया जाना आवश्यक है । यहां तक की जिस फ्रिक्वेंशी बैन्ड पर दूरदर्शन के स्थलीय चैनलों का प्रसारण किया जा रहा हो, उस फ्रिक्वेंशी बैन्ड में केबल सेवा का कोई भी चैनल  सम्प्रेषित नहीं किया जाना है , जबकि शहर के केबल आपरेटर दूरदर्शन को 42 नंबर  चैनल पर प्रसारित कर रहे हैं । इस आशय का पत्र जिलाधीश कांकेर को भेजकर बकायदा अनुरोध भी किया गया है कि अपने अधिकार क्षेत्र में केबल टेलीविजन के नेटवर्क अधिनियम का पूर्ण रूपेण पालन सुनिश्चित करें ।
शहर के केबल संचालकों द्वारा यह भी कहा जाता है कि हम पोस्ट आफिस या आबकारी विभाग द्वारा लायसेन्स का नवीनीकरण एक-एक वर्ष में करवाते हैं, जबकि आबकारी विभाग का कहना है कि जिला कलेक्टर द्वारा तीन-तीन वर्ष के अन्तराल में लायसेन्स का नवीनीकरण किया जाता है । विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि केबल संचालकों द्वारा इलेक्ट्रानिक मीडिया के प्रतिनिधियों से भी प्रतिमाह 2000-2000 हजार रूपये प्रसारण सेवा शुल्क लिया जा रहा है जो कि अवैध वसूली के  दायरे में आ सकता है । यही नहीं मीडिया कर्मियों की एजेंसी धारकों से सैटअप बाक्स व माड्यूलेशन फीस भी वसूल ली जाती है । वर्तमान चुनावों के समय चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों से विज्ञापन के एवज में कितनी राशि ली गई, इसका भी ब्यौरा केबल आपरेटरों के पास है, या नहीं ?
सवाल यह खड़ा होता है कि -शासन प्रशासन के नाक के नीचे केबल आपरेटर यह भी कहते सुने जाते हैं कि अधिकारियों के यहां हमारी सेवायें नि:शुल्क दी जाती है । इस कारण हमें भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है । केबल संचालकों द्वारा दी गई केबल कनेक्शनधारियों की संख्या का ही अगर शहर में सर्वे करा लिया जाये तो विरोधाभासी आंकड़े प्रशासन के सामने होगे । क्या इलेक्ट्रानिक मीडिया की चादर ओड़कर या उन्हें अपने साथ मिलाकर केबल आपरेटर केबल कनेक्शन धारियों से इसी तरह बेखौैफ मनमाने ढंग से सेवा शुल्क वसूलते रहेंगे ? क्या प्रशासन इन केबल संचालकों से सेवा शुल्क का निर्धारण कर केबल कनेक्शनधारियों  को राहत देगा?
यदि अच्छी पहल करके प्रशासन इन आपरेटर द्वारा  सेवा शुल्क में निर्धारण करवाता है तो निश्चित रूप से आम जनता को राहत महसूस होगी, और शहर वासियों का प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होगा।

-- इति समाप्तम् --

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