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नए फ्लेवर में नशे के बाजीगर परोस रहे है धुम्रपान का सामान " हुक्का रेस्टोरेंट "

                              सीजी४भा : आप सभी को याद होगी गाँधी जयन्ती  2 अक्तूबर, 2008  से पूरे देशभर में अधिसूचना जारी कर ‘सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान’ को प्रतिबंधित कर सरकार ने  धुम्रपान करने वालो की शामत ला दी थी ,आज वही सरकार धूम्रपान की हिमायती बन नशे के बाजीगर  के साथ मिल कर लोगों की जेबे  निचोड़ने नए जुगाड़ में लगी है ऐसा मै नहीं कहता सरकारी आदेशो की धज्जिया  उडाते , नियम कानून को ताक पर रख  मुह चिढाते " हुक्का रेस्टोरेंट " जो हिन्दुस्तान  के पाश ईलाके से लेकर ,गली कूचो में  धड्ले से चलाये जा रहे उनको  देख के तो कम से कम यही कहा जा सकता है , जब हर तरफ  धूम्रपान’ के  प्रतिबंधित का प्रयास कर स्मोक फ्री  जोन बनाने की पहल की जा रही हो  ऐसे में खुले आम "  रेस्टोरेंट  "  की आड़ में " हुक्का रेस्टोरेंट  " स्मोक फ्री जोन बनाने की बात करने और प्रयास में जुटे लोगो  के मुह में तमाचा है   

                              गाँधी जयन्ती  2 अक्तूबर, 2008 से पूरे देशभर में अधिसूचना जारी कर जीएसआर 417 (ई) दिनांक 30 मई, 2008 के अनुरूप केन्द्र सरकार ने ‘सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान’ से संबंधित नियम संशोधित करके पूर्णत लागू कर दिया है। स्मोक फ्री बनाने के  उद्देश्य से  संशोधित नियमों के अन्तर्गत सभी सार्वजनिक स्थानों पर सख्ती से निषिद्ध है।
 ‘सार्वजनिक स्थलों’ में आडिटोरियम, अस्पताल भवन, स्वास्थ्य स्थान, मनोरंजन केन्द्र, रेस्टोरेंट, सार्वजनिक कार्यालय, न्यायालय भवन, षिक्षण संस्थान, पुस्तकालय, सार्वजनिक यातायात स्थल, स्टेडियम, रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप, कार्यषाला, शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल, रिफ्रेशमेंट रूम, डिस्को, कॉफी हाऊस, बार, पब्स, एयरपोर्ट लॉज आदि शामिल किए गए हैं। इस एक्ट के तहत जो भी व्यक्ति उल्लंखन करेगा उस पर 200 रूपये के आर्थिक दण्ड के साथ दंडात्मक कार्यवाही करने का प्रावधान किया गया है। इस एक्ट के तहत यह भी प्रावधान किया गया है कि जिन होटलों के पास 30 या अधिक रूम अथवा रेस्टोरेंट के पास 30 व्यक्तियों की क्षमता की सीट अथवा अधिक तथा एयरपोर्ट को अलग धूम्रपान क्षेत्र अथवा जगह, नियमों के द्वारा जैसा आवष्यक हो को प्रदान/रखना होगा। अधिनियम के तहत मालिक, प्रोपराइटर, प्रबन्धक, सुपरवाइजर अथवा सार्वजनिक स्थानों के मामलों के प्रभारी यह सुनिष्चित करेंगे कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थलों में धूम्रपान न करें, अधिनियम की अनुसूची-2 में वर्णितानुसार बोर्ड महत्वपूर्ण स्थलों तथा सार्वजनिक स्थल के प्रवेश द्वारों पर विषेष रूप से नियमों को प्रदर्षित करें और धूम्रपान हेतु दी जो वाली एस्टेªज, माचिस, लाइटर तथा अन्य सामान सार्वजनिक स्थल में मुहैया नहीं कराई जाएगी।
                       अमेरिका, यूएई, दुबई, फ्रांस सहित कई बड़े देशों में प्रतिबंधित नशा शीशा चुपके-चुपके हिंद्दुस्तान में पैठ जमा चुका है। नशेड़ियों के आम ठिकानों से इतर यह हुक्का आलीशान रेस्टोरेंट में खुलेआम परोसा जा रहा है। इसका नजारा छत्तीसगढ के गली कूचो पाश ईलाकों में आसानी से देखा जासकता  है  जाहिर है इसके शौकीन मोटी जेब वाले ही हैं। 
     हर कश में लगभग 4 हजार रसायन वाला शीशा का हुक्का डॉक्टरों के अनुसार भी अत्यधिक घातक है , जिसके  ४३ रसायन  घातक यानी कैंसर कारक होते हैं। जैसा कि उन्होंने  बताया, किसी रेस्तरां, होटल या अन्य कहीं भी शीशा का धूम्रपान कर रहे व्यक्ति के साथ पास बैठे लोगों को भी कई घातक रोग लग सकते हैं।
                गौरतलब है की भारत में  तत्कालीन यूनियन हेल्थ मिनिस्टर अंबूमणि रामदास ने डबल्यूसीटीओएच की चौदहवीं प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सार्वजनिक स्थानों, होटलों, बीयर बारों और रेस्तरां में इस तरह के नशे को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया था। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन और कई वैज्ञानिक प्रमाणित कर चुके हैं कि शीशा की लत छोड़ना हेरोइन और कोकीन से भी ज्यादा कठिन है।
                            बावजूद  इसके नशे  के बाजीगर ने लोगों की जेब निचोड़ने नए जुगाड़ के साथ " हुक्का रेस्टोरेंट " को बाजार में उतरा । शान से हुक्का गुड़गुड़ा रहे लोगो को मालूम नहीं है कि धुएं के साथ उनकी रगों में अरब मुल्कों से आया वहां का पुराना नशा ‘शीशा’ घुल रहा है, जो फेफड़ों के कैंसर जैसी घातक बीमारी का सबब भी बन सकता है। हालात से बेखबर पुलिस और प्रशासन  की उदासीनता के चलते  नया धंधा आसानी से चांदी काटने का जरिया बन गया है। विदेशों में इस तरह का नशा मुहैया कराने वाले रेस्तरां कारोबारियों के खिलाफ एंटी ड्रग्स कानून के तहत कार्रवाई के सख्त निर्देश हैं। जानकारों की मानें तो यहां शातिर लोगों ने इसका तोड़ भी फ्लेवर्ड शीशे के रूप में निकाल लिया है। मैलेशिश (शीरा) के साथ टेबोनल या मसाल या जर्क के गर्म होने पर शीशा तैयार होता है। टेबोनल, जर्क और मसाल निकोटीन व तंबाकू युक्त पदार्थ हैं।
             कैसे बनता है शीशा
         विशेषज्ञ बताते हैं मैलेशिश (शीरा) को हुक्के के जार में भरकर ऊपर रखी प्लेट में टेबोनल या मसाल या जर्क डाला जाता है। फिर इसे नीचे लगे बर्नर से गर्म कर किया जाता है। हुक्का पाइप से यह कश शीरा में होता हुआ पीने वाले के मुंह तक पहुंचता है। बॉडी वाल्व से सैट करके इसे खींचने की मात्रा को कम या ज्यादा किया जा सकता है।
                      बहरहाल शहर में शीशा कई नए फ्लेवर में परोसा जा रहा है यह नाश ,इसमें वनीला, नारियल, गुलाब, जैसमीन, शहद, आम, स्ट्राबेरी, तरबूज, पुदीना, मिंट, चेरी, नारंगी, रसभरी, सेब, एप्रीकोट, चाकलेट, मुलेठी, काफी, अंगूर, पीच, कोला, बबलगम और पाइनएपल आदि शामिल हैं। और ये फ्लेवर ही तो है । लाइट नशा है, नुकसानदायक नहीं है। इस दलील के साथ लोगों को हुक्के , धुम्रपान की और अग्रेषित किया जाना और लत का शिकार बनाना कहा तक सही है जबकि    केंद्र और विश्व स्तर पर   धुम्रपान छुडाने के लिया अथक प्रयास किये जा रहे है  सब कुछ जानकर भी लोग इसके शिकार हो रहे  हैं,ये कैसा भारत है ये कैसी आजादी , पुरे विश्व में जो प्रतिबंधित हो वह हिन्दोस्तान की शान बन रही और शिकार हो रहे है हिन्दोस्तान की युवा पीढी जिसे नेहरु से लेकर गाँधी सवारने और सजोये रखने की बात कहते आये क्या ये क्या हुक्का रेस्टोरेंट जायज है । 
       जवाब आपका 
  अपनी राय या विचर जरुर भेजे
              यदि किसी रेस्तरां या सार्वजनिक स्थान में ऐसा हो रहा हो तो शिकायत करें।यदि किसी रेस्तरां या सार्वजनिक स्थान में ऐसा हो रहा हो तो शिकायत करें। छोटे बच्चों को यदि कोई व्यापारी या रेस्तरां संचालक तंबाकू या इससे जुड़े उत्पाद दे रहा है तो उसके खिलाफ शिकायत जरूर करें 

-- इति समाप्तम् --

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