बिनायक सेन नक्सली गतिविधियों में लिप्त जमानत नहीं : हाईकोर्ट
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रायपुर CG4भड़ास. कॉम. बिलासपुर.हाईकोर्ट ने डॉ. बिनायक सेन और पीजूष गुहा की जमानत याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता डॉ. सेन और पीजूष की ओर से 24 और 25 जनवरी को बहस पूरी होने के बाद बुधवार को शासन की ओर से तर्क पेश किए गए। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील की प्रमुख दलील थी कि डॉ. सेन और पीजूष ने नक्सलियों के लिए कोरियर (पत्रवाहक) का काम किया। जस्टिस टीपी शर्मा और आर एल झंवर की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को दिए अपने 20 पन्नों के फैसले में दोनों को नक्सली गतिविधियों में संलिप्त मानते हुए जमानत देना से मना कर दिया। विभिन्न नक्सली नेताओं से मिले दस्तावेज और उनके बयानों में भी दोनों का नाम आया है। अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद बुधवार को फैसला सुरक्षित रख लिया था।गुरुवार को भोजन अवकाश के बाद दोपहर सवा दो बजे कोर्ट में फौरन ही फैसला सुना दिया।
शौच के बदलते संस्कार
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दिल्ली के एक अस्पताल में यह चेतावनी नज़र आई। शौचालय के इस्तमाल को लेकर सामाजिक कैटगरी तेजी से बदल रही है। फिर भी हिन्दुस्तान में तीन तरह के लोग हैं। एक जो खुले में जाते हैं,दूसरे जो इंडियन शैली की शीट का इस्तमाल करते हैं और तीसरा कमोड वाले। शौचालय के इस्तमाल को लेकर अलग अलग संस्कार रहे हैं। इंडियन शैली का इस्तमाल करने वाले जब कमोड का प्रयोग करते हैं तो गड़बड़ी हो जाती है। ज़रूरी नहीं है लेकिन ऐसे हादसे होते हैं।







फेसबुक,ट्विटर,ब्लॉग,यू ट्यूब को अनर्गल सोशल मीडिया बता कर खारिज करने वाले जानकारों को एक बार फिर से अपनी समझ के गिरेबां में झांक लेना चाहिए। खाली वक्त में किसी फालतूपने की अभिव्यक्तियों का माध्यम नहीं है सोशल मीडिया। यह एक एक व्यक्ति के मन का एक ऐसे नेटवर्क की दुनिया में विस्तार है जहां कई मन जुड़ जाए तो देश में सियासी बवाल खड़ा हो सकता है। मीडिया पर नियंत्रण के ज़रिये सत्ता सुख भोगने की आदी सरकारों को सोशल मीडिया के ये खुदरा क्रांतिकारी गंभीर चुनौती दे रहे हैं।
सीजी४भा : आप सभी को याद होगी गाँधी जयन्ती 2 अक्तूबर, 2008 से पूरे देशभर में अधिसूचना जारी कर ‘सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान’ को प्रतिबंधित कर सरकार ने धुम्रपान करने वालो की शामत ला दी थी ,आज वही सरकार धूम्रपान की हिमायती बन नशे के बाजीगर के साथ मिल कर लोगों की जेबे निचोड़ने नए जुगाड़ में लगी है ऐसा मै नहीं कहता सरकारी आदेशो की धज्जिया उडाते , नियम कानून को ताक पर रख मुह चिढाते " हुक्का रेस्टोरेंट " जो हिन्दुस्तान के पाश ईलाके से लेकर ,गली कूचो में धड्ले से चलाये जा रहे उनको देख के तो कम से कम यही कहा जा सकता है , जब हर तरफ धूम्रपान’ के प्रतिबंधित का प्रयास कर स्मोक फ्री जोन बनाने की पहल की जा रही हो ऐसे में खुले आम " रेस्टोरेंट " की आड़ में " हुक्का रेस्टोरेंट " स्मोक फ्री जोन बनाने की बात करने और प्रयास में जुटे लोगो के मुह में तमाचा है



















