जनता के पैसे पर नेतावो का उत्सव
हैप्पी बर्थ डे "छत्तीसगढ", आज "हमर छत्तीसगढ" ९ साल पूरा कर 10 वे साल में कदम रखेगा. फिर एक बार राजन का परचम लहराएगा, फिर ए़क बार बखानो का पुलिंदा पकडा दिया जायेगा, फिर ए़क बार राज्य के घरो में अँधेरा कर कोठियों को प्रजव्लित किया जायेगा, फिर ए़क बार बाहर से आये महानुभाओं का हम सत्कार करेगे और उपकार सुनेगे, फिर एक बार खेल के मैदानों को गढढो में तबदील कर छोड़ दिया जायेगा, फिर ए़क बार 2.5 करोड़ जनता इसकी तमाश बीन बनेगी. इस तरह आज से छतीसगढ में स्थापना दिवस का ऊलास परवान चढेगा, सात दिन का उत्सव सात करोड़ खर्च और सात महीने से सरकारी कर्मचारी का काम बंद, यही दांस्ता है छग राज्योत्सव की
दरसल हम बात कर रहे है हर साल मनाये जाने वाले राज्योत्सव की,छत्तीसगढ में प्रति वर्ष मनाया जाने वाले राज्य उत्सव में नाम राज्य का होता है पर यह उत्सव, किसी और के लिया, पुरे ९ साल हो गए छत्तीसगढ राज्य बने इन ९ सालो में प्रदेश ने विकास के बहुत से आयाम और ऊचईओ के परचम लहराए, हम धनी है सिर्फ इस लिए की हमारे पास कोयला ,बिजली और आनाज है बावजूद इसके जिनके पैरो तले बहुमूल्य खनिज और अनाज का भंडार है ना तो उसके पैरो में चप्पल और ना ही सर पे छत्त है. सालो से यह सुनते आये है की विकास की नदिया बहेगी, विकास आपकी डेहरी पर होगा, बेशक हमने विकास किया है गंदगी फैलाने में विकास किया, भ्रष्टाचार में विकास किया, प्रदूषित काला धुँआ और शराब फेट्री का गन्दा पानी नदियों में फेक कर जल प्रदुषण में विकास किया, भष्ट अधिकारी को बचा कर ईमानदार के तबादला करने में विकास किया, बेशक ये विकास नहीं तो और क्या है, विकास के और भी बहुत से आकर्षण है पलायन पीडा, दर्द पर मानो अब ये हमारे संगी साथी बन गए हो विडम्बना यह भी है की अब इन दर्द भरे जख्मो को किसी मरहम की दरकार नहीं. कुछ पल ठहर के याद करते उस अविभाजित छत्तीसगढ को...... कुछ खास नहीं बदला इन ९ सालो में बस चहरे नए और काम वही ............ फिर भी कागजी विकास और चबूतरों की सुन्दरता ने प्रदेश को गैरान्वित किया है. राज्य में खुशहाली का डिडोरा पीटने वाले वातानुकूलित कमरों से बाहर झांक कर देखे खुशहाली की डोर हाथ से फिसलती नजर आएगी और हर गली चोराहो पर विरोध और प्रदर्शन के सुर सुनाई और दिखाई पड़ेगे
छतीसगढ की बात हो और सस्ता अनाज का जिक्र न हो ऐसा कैसे हो सकता है २ रू किलो चावल में गरीबो की बदली तक़दीर और तस्वीर नजर आती है जिसकी आवाज अब दुसरे प्रदेशो में भी सुनाई देने लगी है बेशक धान के कटोरे की तक़दीर और तस्वीर बदली है तभी तो हर घर के सामने उनके नाम की जगह बीपील या अन्य किसी योजना का नाम लिखा नजर आता है जैसे किसी के माथे पर लिखा दिया हो की तुम गरीब हो और रहोगे .............. इन ९ सालो में सरकार ने बहुत से क्रांतिकारी कदम ऊठाए और योजनाये चलाई पर आज भी सूचना के अधिकार के तहत जानकारी पाने के लिए यहाँ सालो इंतजार करना पड़ता है
बहरहाल इस ऐतिहासिक मोके पर भी हम राज्य सरकार की ऐतिहासिक गलतियों को गिना रहे है जो शायद हमारा रोज का काम है लेकिन छतीसगढ वासियों से पूछना चाहता हु इन सब के बावजूद उनकी सोई चेतना जाग्रत क्यों नहीं होती क्यों वे सडको पे वाहन पार्क कर कर्तव्यों को भूल अधिकारों की बात करते है क्यों सरकार के बहुआयामी योजनाओं और आश्वाशन के बाद पलायन जारी है, क्यों सुचना का अधिकार मिलने के बाद भी छतीसगढवासी अर्जी दाखिल नहीं कर पाते..... ऐसे अनेको सवाल वर्ष २००९ राज्योत्सव से पूछ रहे है .............
लागिन फार्म

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