बाबा बोले, वही ठीक...
छत्तीसगढ़ की संस्कृति सीधे सरल शब्दों में यह है कि जो अच्छा लगे उसे अपना लो, बुरा लगे सो जाने दो... इस संस्कृति का परिपालन यहां का हर वाशिंदा करता है और जो इस प्रदेश में सरकार चलाए वह भी इसी संस्कृति के तहत ही व्यवहार कर सकता है। संभवत: इसीलिए हाल ही एक समारोह में दो विधाओं के दिग्गजों के बीच टकराव की जगह परस्पर सम्मान का भाव प्रकट हुआ और एक विवाद उत्पन्न होने से बच गया। यदि वह स्थिति छत्तीसगढ़ के अलावा कहीं और निर्मित हुई होती तो पक्के तौर पर यह वैचारिक अवरोध दुनियाभर में चर्चित हो गया होता।
नमन और समरण
लाल बहादुर शात्री जी की आज पुण्यतिथि है पर आज देश उन्हें भुला चूका है साधारण किसान परिवार के इस असाधरण व्यक्तितिव को हम कैसे भूल गए..... क्यों हम भूल गए गुदड़ी के इस लाल को जिन्होंने जय जवान जय किसान का नारा दे राष्ट्र को एक नई दिशा दी क्यों अन्य राजनेतावो की तरह इन्हें याद नहीं किया गया ?
लाल बहादुर शात्री जी की पुण्यतिथि पर उन्हें....... नमन और समरण
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छत्तीसगढ में कितने बाबूलाला ... मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़...
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