एंटी करप्शन ब्यूरो(EOW )आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की जांच कोंन करेगा ...?
रायपुर CG4भड़ास . भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों की पोल खोलने वाला एंटी करप्शन(EOW ) ईओडब्लू अब तक एक भी भ्रष्टाचारी को सजा नहीं दिलवा सका है।
छत्तीसगढ़ राज्य अस्तित्व में आने के बाद विभाग ने 34 छापे मारकर करोड़ों का भ्रष्टाचार उजागर किया। पर महकमे की कार्रवाई केवल छापा मारने तक ही सीमित रही।
एक भी भ्रष्ट अधिकारिरियो को सजा दिलाना तो दूर, विभाग ने न्यायालय में चालान तक पेश नहीं किया। ज्यादातर छापों के बाद भ्रष्टाचारी को क्लीन चिट देकर केस ही खत्म कर दिया गया है।
एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्लू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो)दोनों विभागों के पास कई केस ऐसे हैं, जिनकी 10-10 साल से जांच ही चल रही है। यानि अमला उनकी तहकीकात ही पूरी नहीं कर सका।
हमने ’ पुराने छापों के बारे में पता लगाया, तब यह सनसनीखेज हकीकत सामने आई। चौंकाने वाली बात है कि जिन 34 अधिकारियों-कर्मचारियों के घरों में एंटी करप्शन या ईओडब्लू का छापा पड़ा था, उन्हें कुछ दिन के लिए सस्पेंड किया गया।
मला शांत होने के बाद उन्हें वापस सेवा में ले लिया गया। उनमें से ज्यादातर को फिर मलाईदार जगहों पर पदस्थ कर दिया गया। महत्वपूर्ण कार्यक्रम और जिम्मेदारियों उन्हीं के हाथ हैं। फाइनेंस की जिम्मेदारी भी उन्हीं से ली जा रही है।
2005 में पहला छापा
एंटी करप्शन ब्यूरो ने गठन होने के बाद सबसे पहला छापा शिक्षा विभाग के लेखापाल अशोक नगपुरे के घर पर मारा था। वर्ष 2005 में लेखापाल के घर से सवा करोड़ रुपए की आय से अधिक संपत्ति मिली थी। राज्य का पहला छापा होने के कारण उस समय इस कार्रवाई को लेकर खासी खलबली मची थी। अभी तक उस केस की जांच चल रही है।
लेखापाल शिक्षा विभाग में खास जगह पदस्थ हैं। ईओडब्लू ने 2001 में तत्कालीन आबकारी उपनिरीक्षक ममता शर्मा के घर छापा मारा था।21 लाख से ज्यादा की अघोषित संपत्ति मिली थी। इस केस की विवेचना पूरी नहीं हुई है।
तत्कालीन आई जी कहते है "मेरे कार्यकाल में जितने छापे मारे जा रहे हैं, उनका चालान 3 माह के भीतर पेश कर दिया जाएगा। पुराने केस के बारे में चालान पेश नहीं करने को लेकर अफसरों से जवाब तलब किया जाएगा। "
7 करोड़ के केस कोर्ट जाने के पूर्व ही खत्म
आरोपी व पद छापे की तारीख मिलीसंपत्ति
अनिल शर्मा सीईओ प्रदूषण मंडल जनवरी 2006 91.55 लाख
संतोष त्रिपाठी पटवारी जून 2006 21.63 लाख
एसके राठौर इंजीनियर जल संसा. जून 2006 3.36 करोड़
राजू निहलानी वन विभाग अगस्त 2006 93.64 लाख
रामसखा वर्मा स्वास्थ्य विभाग मई 2005 80.57 लाख
एम.गोविंद राव वन विभाग मई 2005 1.34 करोड़
बहरहाल इनकी फेहर लिस्ट बहुत लम्बी है और यह बात सच साबित होती नजर आ रही है की (EOW ) ईओडब्लू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) विभाग मतलब मुख्यमंत्री का थाना जिसमे सभी कार्यवाही सिर्फ छापे तक ही सीमित है और उसके बाद बरामद अनुपात हीन सम्पत्ति का बंदरबांट कर पूरा केस ही रफा दफा और उपहार स्वरूप उन अघोषित संपत्ति के मालिको जिन्होंने EOW ) ईओडब्लू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) विभाग को करोडो रु का फायदा पहुचाया उन्हें उपक्रत कर विभाग के मलाईदार पद के साथ- साथ फाइनेंस की जिम्मेदारी का तोहफा सरकार और विभाग द्वारा दिया गया . क्या इससे नहीं लगता की भ्रष्ट अधिकारी की जांच तो (EOW ) ईओडब्लू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) कर लेती है पर (EOW ) ईओडब्लू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) की जांच कोन करेगा कैसे केस कोर्ट जाने के पूर्व ही खत्म हो जाते है ? इसकी जांच कोंन करेगा .. क्या अब भी आप कहेगे की छत्तीसगढ़ क्रेटिबल है जिसके आए दिन सरकार बखना करती है यह एक आश्चर्यजनक सच है मेरी माने तो भविष्य में उत्तराखंड में उजागर मधु कोड़ा सरकार घोटालो से बड़े घोटालो में छात्तीसगढ़ का भी नाम पीछे नहीं रहेगा ..... अब देखना यह है की सांप की जांच तो अजगर से कराई जा रही है अजगर की जांच कैन करेगा .....?
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